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Zelenskyy warns Indians against joining war by Russia | Ankit Agrawal Study IQ
जेलस्की का बयान और UNGA संदर्भ
00:00नमस्कार दोस्तों। दोस्तों, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की पहुंचे हुए हैं न्यूयॉर्क क्योंकि वहां पर यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली का 81 सेशन स्टार्ट हो चुका है और दुनिया भर के जो लीडर्स हैं आते हैं वहां पर अपनी बात रखते हैं। साथ ही साथ जेलस्की वहां की जो मीडिया है उनसे भी बातचीत कर रहे हैं और उसी के दौरान उन्होंने भारत और रशिया के रिलेशंस को लेकर काफी कुछ कहा। आप देख सकते हो खबर। रशिया इज बेसिंग इट्स इकॉनमी ऑन इंडिया। यहां पर जेलस्की ये कहना चाह रहे थे कि रशिया आज के डेट में भारत से बहुत ज्यादा मदद ले रहा है। अगर भारत रशिया की मदद करना बंद कर दे तो यहां पर यूक्रेन वॉर रुक सकता है। मतलब डायरेक्टली पूरा का पूरा जो ठीकरा है वो भारत के ऊपर डालने की कोशिश की जा रही है। तो इसको हम थोड़ा सा डिटेल में देखेंगे और साथ ही साथ जब
00:44यूनाइटेड नेशन की जनरल असेंबली में उन्होंने बोला तो उसमें भी कई वार्निंग दिए भारत को। तो इसको बारे में आपको बताऊंगा। चलिए आगे बढ़ते हैं। लेकिन उससे पहले आप सबको बता दूं कि आज रात 12:00 बजे तक आप हमारे किसी भी स्किल बेस्ड कोर्स को ले सकते हैं। जहां पर आपको एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल रहा है। जैसे इंडस्ट्री में आजकल डाटा एनालिटिक्स की काफी डिमांड है। वो आप अवेल कर सकते हो। या फिर अगर आप एआई सीखना चाहते हैं। किसी भी फील्ड में स्टूडेंट हैं, बिजनेस कर रहे हैं। अगर आप एआई का सही यूज़ करना चाहते हैं, तो यह पूरा 10 हफ्ते का कोर्स होगा। 60 आवर्स की लाइव क्लासेस होंगी। या फिर डिजिटल मार्केटिंग विद ए। ये सब कुछ आपको बहुत कम दाम पर मिल रहा है। लिंक कमेंट सेक्शन में दिया हुआ है। यूज़ करिएगा कोड अंकित लाइव मैक्सिमम डिस्काउंट के लिए। और यह फोन
रूस की अर्थव्यवस्था और भारत की ऑयल खरीद
01:24नंबर है। कोई डाउट है, प्रॉब्लम है, बैच को लेकर इस पे कॉल करिए। मेरी टीम आपको गाइड कर देगी। चलिए शुरुआत करते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि हुआ क्या है। देखिए व्लादमीर जेलस्की उन्होंने यहां पर यह कहा है कि रशिया की जो एबिलिटी है यूक्रेन वॉर में पार्टिसिपेट करने की यह काफी हद तक एनर्जी रेवेन्यू से कनेक्टेड है। उनका यह कहना है कि दुनिया के बहुत सारे ऐसे देश हैं जो रशिया से अभी भी ऑयल ले रहे हैं। एनर्जी खरीद रहे हैं। जैसे भारत, चाइना, टर्की और अगर ये देश यहां पर ऑयल खरीदना बंद कर दें तो एक प्रकार से रशिया के लिए इस वॉर में कंटिन्यू करना काफी मुश्किल हो जाएगा। तो यहां पर समझने की कोशिश करनी है कि जेलस्की भारत को स्पेसिफिकली क्यों टारगेट कर रहे हैं। क्योंकि उनका ये कहना है कि रशिया को बहुत सारा फॉरेन एक्सचेंज
02:08जो रेवेन्यू है वो क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, नेचुरल गैस बाकी के कमोडिटीज बेचकर मिलता है। तो यूक्रेन का आर्गुमेंट यही है कि रशिया की जो एनर्जी एक्सपोर्ट का रेवेन्यू है अगर वो हम खत्म कर दें तो एक प्रकार से यूक्रेन को काफी मदद होगी। अच्छा यहां पर यह बात भी सही है कि अगर आप देखोगे भारत जो है रशिया का काफी बड़ा इंपॉर्टेंट पार्टनर बन गया है ऑयल के मामले में। 2022 में जब यह पूरा वॉर स्टार्ट हुआ था उसके पहले भारत हार्डली 1% भी ऑयल नहीं खरीद पाता था रशिया से। हम बाकी और देशों से खरीदते थे स्पेशली मिडिल ईस्ट से। लेकिन रशिया से हमारा ऑयल इंपोर्ट बहुत कम था। लेकिन होता क्या है कि यहां पर वॉर स्टार्ट होता है। सेंशंस लगाया जाता है रशिया के ऊपर। अब रशिया के ऊपर भी प्रेशर हो गया क्योंकि वो यूरोप को ऑयल बेच नहीं पा रहा था तो कहीं ना कहीं
02:54उसको ऑयल बेचना था और उसने डिस्काउंट भी दिया। अब भारत के लिए भी अपॉर्चुनिटी हो गई भारत ही नहीं चाइना टर्की बहुत से देशों के लिए कि भाई सस्ते में ऑयल मिल रहा है तो क्यों नहीं खरीदेंगे? तो इसी को देखते हुए भारत ने अपना आज के डेट में जो ऑयल का सोर्स है रशिया एक मेजर पार्टनर बन गया है। मतलब आज के डेट में 35% से ज्यादा जो ऑयल है वो अकेले हम रशिया से मंगा रहे हैं। और उसी के बाद से आप देखोगे तो मेजर क्रूड सप्लायर बन गया भारत का रशिया। तो यूक्रेन के पर्सपेक्टिव में भारत कोई छोटा-मोटा बायर नहीं है। यह एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पार्ट बन चुका है रशिया के ऑयल ट्रेड स्ट्रक्चर का। अच्छा इसको देखते हुए रशिया ने भी काउंटर किया। जैसे ही जेलस्की की तरफ से ये स्टेटमेंट आया यहां पर भारत के बचाव में भी रशिया आया। तो अगर आप
रूस का बचाव और भारत का तर्क
03:40देखोगे रशिया का क्या कहना है? रशिया के यह कहना है कि देखिए भारत रशिया के वॉर में मदद नहीं कर रहा है। भारत तो सिंपली अपनी जो एनर्जी रिक्वायरमेंट है उसको फुलफिल करने की कोशिश कर रहा है। जो रशियन एंबेसडर हैं टू इंडिया उन्होंने यहां पर ये आर्गुमेंट रखा कि देखिए भारत का जो परचेस है इट इज़ ड्रिवन बाय इट्स ओन नेशनल डेवलपमेंट एंड एनर्जी रिक्वायरमेंट रादर देन एन इंटेंशन टू सपोर्ट मॉस्को। मतलब यहां पर भारत इसलिए ऑयल थोड़ी खरीद रहा है कि रशिया जो है वो यूक्रेन के ऊपर अटैक करे। इट इज सिंपली बिकॉज़ कि हमारे यहां पर इतनी बड़ी आबादी और भारत ये आर्गुमेंट बार-बार देता आया है कि हमें काफी सारा पेट्रोल चाहिए, डीजल चाहिए, एवोल्यूशन, फ्यूल, एलपीजी चाहिए। हम सब चीजों के ऊपर डिपेंडेंट है। तो भारत का जो इंपोर्ट है लार्ज प्रपोर्शन ऑफ क्रूड ऑयल
04:27रिक्वायरमेंट के थ्रू होता है। एंड दैट इज व्हाई भारत क्या देखेगा? सरकार यही देखेगी कि जहां पर सस्ता मिल रहा है क्रूड ऑयल वहां से खरीदो। क्यों अगर कोई हमें ₹80 में दे रहा है और वहीं बाकी जगह पर ₹100 में अवेलेबल है तो हम ₹80 वाला क्यों नहीं खरीदेंगे? तो दैट इज व्हाई ये भारत का आर्गुमेंट आया। अच्छा स्पेशली 2026 में ये और ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है। नाउ जस्ट इमेजिन अगर हम आज के डेट में सिर्फ मिडिल ईस्ट से ऑयल खरीद रहे होते। तो कैन यू इमेजिन आज हमारी क्या हालत हो रही होती। स्पेशली स्टेट ऑफ होमस में देखिए कितनी प्रॉब्लम है। स्टेट ऑफ़ होरमूस छोड़िए। अभी आपने देखा होगा बाबेलमैन जो सऊदी अरब और यमन के बीच में पूरा जो होतीज़ हैं उनके बीच में वॉर स्टार्ट हुआ। तो हर तरफ प्रॉब्लम चल रही है। अगर हम सिर्फ मिडिल ईस्ट के ऊपर ही कुछ ही देशों के ऊपर
05:12डिपेंडेंट होते तो ये हमारे लिए कॉम्प्लिकेट हो जाता। प्रॉब्लम आ जाता। तो भारत ने भी सोचा एक तो हमें यहां पर डायवर्सिफाई करने का मौका मिल रहा है और साथ ही साथ सस्ते में ऑयल मिल रहा है। तो हम क्यों नहीं खरीदेंगे? तो रशिया का आर्गुमेंट यही है कि भारत अपना डायवर्सिफिकेशन कर रहा है। अगर हम रशिया से आज के डेट में 35-40% ऑयल मंगा रहे हैं। इराक से 20% मंगा रहे हैं। सऊदी अरब से 15%, यूएई से 10% तो ये अलग-अलग सोर्सेस से मंगा रहे हैं। अगर कहीं एक जगह पर डिसररप्शन आता है तो अचानक से भारत को इंपैक्ट नहीं करेगा। अदरवाइज भारत मिडिल ईस्ट के ऊपर फिर बहुत ज्यादा डिपेंडेंट हो जाता। और देखिए ऐसा नहीं है कि भारत सिर्फ यही देख रहा है कि क्योंकि रशिया हमारा क्लोजेस्ट पार्टनर है। काफी लंबे समय से साथ दिया है तो सिर्फ हम उसकी वजह से नहीं
05:56ले रहे हैं। आपको मैं एग्जांपल बताता हूं। अभी अगस्त के महीने में क्या हुआ था? रशिया से जो हम क्रूड ऑयल ले रहे थे लगातार उसमें कमी भी आई है। लगभग 16.5% क्रूड ऑयल में गिरावट आई है। जो हमने जुलाई में जितना क्रूड ऑयल लिया था रशिया से उससे लगभग 16 1/2% हमने कम लिया है। व्हिच इज़ अराउंड 2.1 मिलियन बैरल्स पर डे। और सेप्टेंबर का आंकड़ा मैं आपको बता दूं। अभी तक जो आंकड़ा आया है वो पहुंच चुका है 1.9 मिलियन बैरल्स पर डे। मतलब देखो सिंपल सी बात है। अगर रशिया से ऑयल खरीदना हमारे लिए सस्ता पड़ेगा। हमारे लिए इकोनॉमिकली फीज़बल होगा। तो हम ऑयल लेंगे। जिस दिन रशिया भी हमारे लिए महंगा हो जाएगा बहुत मुश्किल हो जाएगा तो हम ऑयल खरीदना बंद कर देंगे। सिंपल सी चीज है। अच्छा यहां पर एक और इंटरेस्टिंग जो फैक्टर अभी सामने हमारे
अमेरिका का 100% टैरिफ बिल
06:40वो है यूएस का फैक्टर। आप सब जानते हो यूएस ने रिसेंटली एक बिल पास किया और यह कह दिया कि जो भी कंट्री रशिया का ऑयल खरीदेगा हम उसके ऊपर 100% तक टेरिफ लगा सकते हैं और ट्रंप ने इस बिल पर साइन भी कर दिया है। मतलब अब ट्रंप के पास पावर आ गई है कि वो कभी भी भारत के ऊपर प्रेशर बना सकता है। चाइना के ऊपर प्रेशर बना सकता है कि हम यहां पर 100% टेररिफ लगा देंगे। और आप देख ही रहे हो कि अभी शी जिनपिंग जो है ट्रंप से मुलाकात कर ही रहे हैं। तो ये बहुत सारी चीजों को लेकर डिस्कशन होगा। हो सकता है कि शी जिनपिंग के आने के पहले ये एक प्रेशर टैक्टिक्स की तरह अपनाया गया होगा अमेरिका के द्वारा कि जल्दी से बिल पास करा दो और धमकाने की कोशिश करो। तो एक प्रकार से देखो भारत जो है वो इन सभी प्रेशर्स के बीच में है। एक तरफ यूक्रेन कह रहा है कि रशिया से ऑयल मत
जयशंकर का जवाब और ऑयल प्राइस तर्क
07:24लो। रशिया कह रहा है कि भारत लेगा अगर उसको रिक्वायरमेंट है। अमेरिका कह रहा है कि अगर लोगे तो हम टेरिफ लगाएंगे। तो भारत को इन सभी चीजों को बैलेंस करना है। अच्छा भारत का रिस्पांस क्या है? को अभी कोई स्पेशली अलग से भारत ने रिसोंड नहीं किया है। लेकिन जो एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर हैं एस जयशंकर साहब उन्होंने यही आर्गुमेंट दिया था कि हम अगर मान लो कल के डेट में ऑयल खरीदना बंद भी कर देते हैं रशिया से तो आपको क्या लगता है कि यहां पर क्या रशिया यूक्रेन वॉर एंड हो जाएगा? एस जयशंकर साहब का कहना है कि वॉर इस तरह खत्म नहीं होते। वॉर खत्म होता है नेगोशिएशंस के थ्रू और डिप्लोमेसी के थ्रू ना कि एक देश अगर सामने वाले देश से ऑयल खरीदना या फिर कोई कमोडिटी खरीदना बंद कर दे तो वॉर रुक जाएगा। ऐसे होता नहीं है। और इनफैक्ट भारत का एक ये भी काउंटर
08:06आर्गुमेंट है कि देखो मान लो अगर हम रशिया से ऑइल नहीं खरीदते हैं तो हमें दूसरे मार्केट में लेना होगा, मिडिल ईस्ट में लेना होगा, वेनेजुएला और बाकी देशों पर जाना होगा। अब अगर हम वहां पर जाएंगे तो इसका मतलब वहां पर डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई तो उतनी है नहीं। तो अल्टीमेटली होगा क्या कि ऑयल के प्राइसेस और बढ़ेंगे। ऑयल के प्राइस बढ़ेंगे तो अमेरिका में भी इनफ्लेशन आएगा। पूरी दुनिया के ऊपर आएगा। तो ये पूरी दुनिया की इकॉनमी के लिए अच्छा नहीं है कि आप जानबूझकर जो ऑयल की सप्लाई है उसको स्क्वीज़ करना चाह रहे हो। अचानक से रशिया का ऑयल मार्केट से गायब हो जाए इमेजिन तो कितनी बड़ी संकट आ सकती है। तो भारत इसी चीज को लगातार फोकस कर रहा है। अच्छा ये तो आर्गुमेंट था ही। साथ ही साथ जेलस्की ने यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली में यहां पर अपनी बातें रखी और
रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती
08:47उसमें डायरेक्टली भारतीयों को वार्निंग दी। चेतावनी दी। देखो यहां पर उनका यह कहना है कि रशिया जो है वो करीब 47 कंट्रीज से लोगों को ला रहा है और इस वॉर में धकेल रहा है। चाहे भारत है, नेपाल है, घाना, ताजाकिस्तान, यमन, केन्या बहुत सारे देशों से। उनका आर्गुमेंट यह है कि यह जो लोग हैं वो बहला फुसला के जो है इन लोगों को वॉर में धकेलने की कोशिश करते हैं। डिसेप्ट करने की कोशिश करते हैं। और जहां तक ये बात है वो सही भी है। अगर आप देखोगे खुद भारत सरकार ने माना है। अभी जो फॉरेन सेक्रेटरी हैं विक्रम मिश्री जी उन्होंने सितंबर 2026 में ये स्टेटमेंट दिया था कि 227 इंडियन नेशनल्स उनको रिक्रूट किया गया था रशियन आर्म्ड फोर्सेस में। जिसमें से 139 को डिस्चार्ज किया जा चुका है और 51 ऑलरेडी मारे जा चुके हैं। तो इंडियन
09:35गवर्नमेंट खुद इस चीज को एकनॉलेज करती है कि हां कुछ गड़बड़ी चल रही है, प्रॉब्लम चल रहा है और हमें इसको रोकने की जरूरत है और भारत भी रशिया के साथ लगातार इस पर बातचीत करता रहता है। और इनफैक्ट अगर आप देखोगे तो सवाल ये आता है कि भारतीय कैसे पहुंच जा रहे हैं रशियन मिलिट्री में। देखो यहां पर ऐसा नहीं है कि जो भारतीय वहां पर जा रहे हैं उनको यह बोला जा रहा है कि आपको यूक्रेन के साथ वॉर लड़ना है। उनको दिखाया जा रहा है कि आप सिविलियन एंप्लॉयमेंट के लिए जा रहे हो। वहां पर आपके लिए अपॉर्चुनिटी है। लेकिन यहां पर हाई सैलरीज का बहाना देकर, बोनसेस का बहाना देकर, सोशल बेनिफिट का बहाना देकर अल्टीमेटली उनको यूक्रेन वॉर में धकेला जाता है। और जहां तक सवाल है कि रशिया को फॉरेन फाइटर्स की क्यों आवश्यकता है? जाहिर सी बात है कि रशिया भी बहुत ज्यादा
10:15अपने खुद रशियंस के ऊपर डिपेंड नहीं हो सकता क्योंकि ये वॉर बहुत लंबा खींच चुका है। सोच के देखो 4 साल से ऊपर हो चुके हैं 4 1/2 साल और कब तक ये चलेगा कुछ किसी को पता नहीं। तो रशियन सिटीजंस तो लड़ ही रहे हैं। प्लस साथ ही साथ वॉलंटियर्स, कॉन्ट्रैक्ट सोल्जर्स, फॉरेन रिक्रूट्स बहुत सारी चीजों के थ्रू रशिया जो है लोगों को रिक्रूट करता है ताकि उस वॉर में रशिया की मदद मिल सके। तो जो फॉरेन रिक्रूटमेंट है इसकी वजह से रशिया को कई हेल्प मिलता है। एक तो जो प्रेशर है डोमेस्टिक रिक्रूटमेंट पर वो कम हो जाता है। मैन पावर की शॉर्टेजेस फिल हो जाती है। बैटल फील्ड स्ट्रेंथ मेंटेन रहता है रशिया का। तो दैट इज व्हाई रशिया लगातार फॉरेन फाइटर्स को चाहता है। और जहां तक भारत का सवाल है लास्ट में ध्यान रखिएगा। हमारा डिप्लोमेटिक पोजीशन इंटरेस्टिंग है
भारत की डिप्लोमेटिक स्थिति
10:57वो यही है कि हम दोनों रशिया और यूक्रेन के साथ रिलेशंस मेंटेन करते हैं। रशिया के साथ तो करते ही हमारा रिलेशंस काफी अच्छा है। यह तो आप सब जानते हो। साथ ही साथ यूक्रेन के साथ भी डायलॉग की हम बात करते हैं और यही कहते हैं कि देखो यहां पर पीसफुल रेोल्यूशन होना चाहिए। एस जयशंकर साहब ने भी रिसेंटली मुलाकात किया था और यही कहा था कि दिस इज़ नॉट एन एरा ऑफ़ वॉर। मतलब अगेन हम भी चाहते हैं कि ये जो वॉर है वो पूरी तरह से खत्म हो। क्योंकि वॉर खत्म होगा तो इससे ओवरऑल ग्लोबल इकॉनमी को ही फायदा है। देखते हैं अब आगे इसको लेकर क्या होता है। बट आई होप कि ये जो भी कुछ हुआ ये इंसिडेंट ज़ंस्की ने जिस तरह से वार्निंग दी क्या था वो सब कुछ आपको समझ में आ गया होगा। और जाने से पहले एक बहुत ही इंटरेस्टिंग क्वेश्चन क्या आप बता सकते
11:35हो इनमें से कितने ऐसे देश हैं जिनकी लैंड बाउंड्री यूक्रेन और रशिया दोनों के साथ सटती है दोनों के साथ शेयर होती है और इसका जो राइट आंसर है आप सब जानते हो मेरे Instagram पर तो मिलेगा ही वहां पर अगर आप नहीं हो कोई बात नहीं tlegram से ले सकते हैं इसका सही उत्तर और दोस्तों जैसा मैंने आपको बताया आज रात 12:00 बजे तक हमारे जो स्किल बेस्ड कोर्सर्सेस हैं उसके ऊपर जो ऑफर है उसका फायदा उठाइए चाहे डाटा एनालिटिक्स है ji फॉर भारत जिसमें 60 आवर्स की लाइव क्लासेस है डिजिटल मार्केटिंग वि कोई भी कोर्स जो आपको पसंद हो लीजिए। लिंक कमेंट सेक्शन में दिया है। वहां पर जाइए और सारी और डिटेल मिल जाएगी कि किस तरह से आप अपने स्किल को बढ़ा सकते हैं। और यह फोन नंबर है। कोई डाउट है, प्रॉब्लम है बैच को लेकर इस पर कॉल करिए। यूज करिए कोड अंकित लाइव मैक्सिमम
12:16डिस्काउंट के लिए। स्टडी आईक्यू आईएस [संगीत] आपका सिलेक्शन हमारा मिशन।